Wednesday, December 5, 2018

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्‍स 194 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी गिरावट

सप्‍ताह के तीसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार की खराब शुरुआत हुई और सेंसेक्‍स 194 अंक लुढ़कर 35,940 पर खुला जबकि निफ्टी 63 अंक लुढ़कर 10, 806 पर खुला.  जिन शेयर्स में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई उनमें एनटीपीसी, ओएनजीसी, एशियन पेंट, कोल इंडिया शामिल हैं.

इससे पहले भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन भी ठीक नहीं रहा और सेंसेक्‍स 107 अंक गिरकर 36,134 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी भी लुढ़ककर 10869 पर आ गया. मंगलवार को आईटी सेक्‍टर से जुड़े इन्‍फोसिस, विप्रो और टीसीएस बढ़त के साथ बंद हुए. इसके अलावा ओएनजीसी, वेदांता, कोल इंडिया, बजाज ऑटो, आईसीआईसीआई बैंक, हीरो मोटो, टाटा स्‍टील में भी तेजी दर्ज की गई. जबकि कोटक बैंक, एक्सिस बैंक, एलटी, अदानी पोर्ट्स, आईटीसी, मारुति, एशियन पेंट्स, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.

सोमवार को 36,241 अंक पर बंद हुआ था बाजार

सोमवार को लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा था. कच्चे तेल की कीमत में तेजी, रुपये में कमजोरी और GDP आंकड़े नीचे आने के बाद भी शेयर बाजार लाभ में रहे. बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्स 47 अंक की मामूली बढ़त के साथ 36,241 अंक पर बंद हुआ जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 7 अंक की बढ़त के साथ 10,883.75 अंक पर बंद हुआ था.

रुपये की भी कमजोर शुरुआत

वहीं बुधवार को रुपये की शुरुआत भी कमजोरी रही. डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे टूटकर 70.64 के स्तर पर खुला.  डॉलर के मुकाबले रुपया कल 4 पैसे की कमजोरी के साथ 70.49 के स्तर पर बंद हुआ था.

पिछली बैठक के समय जहां वैश्विक स्तर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें महंगाई का बड़ा खतरा पेश कर रही थीं, अक्टूबर-नवंबर के दौरान यह खतरा कुछ हद तक टलता दिखाई दिया. पिछली बैठक से लेकर अबतक पेट्रोल-डीजल की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक कम हो चुकी हैं. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में भी सुधार से अर्थव्यवस्था में दबाव बीते दो महीने के दौरान कम हुआ है. इस राहत के बावजूद कच्चे तेल को लेकर चुनौती अभी स्थायी तौर पर नहीं टली है.

रिजर्व बैंक के सामने मौद्रिक समीक्षा के दौरान सीआरआर एक पेचीदा विषय है. इसका अंदाजा इसी से लगता है कि केन्द्रीय बैंक ने 2013 के बाद से सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया है. बीते कुछ महीनों के दौरान जिस तरह केन्द्र सरकार ने बाजार में तरलता बढ़ाने की मांग रखी है और इसको लेकर रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार ने खींचतान भी देखने को मिली है, ऐसे में तरलता को लेकर केन्द्रीय बैंक से अहम फैसले का उम्मीद की जा सकती है.

हालांकि बीते कुछ समय से रिजर्व बैंक ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिए बाजार में तरलता के स्तर में लगातार इजाफा कर रहा है. रिजर्व बैंक नवंबर और दिसंबर के दौरान भी ओएमओ के जरिए तरलता बढ़ाने की कवायद करेगी. इस तथ्य को देखते हुए मौद्रिक समीक्षा में सीआरआर कटौती की संभावना आधी हो जाती है. गौरतलब है कि सीआरआर में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती से बैंकों के पास 65,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता होगी.

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