महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद से राजनीतिक बैठकों और बयानबाज़ी का दौर थम नहीं रहा है.
कभी हां, कभी ना का सिलसिला और सरकार बनाने का सस्पेंस बना हुआ है. एक तरफ़ शिवसेना और बीजेपी में रिश्ते तल्ख़ दिख रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ राजनीतिक हलचल भी तेज़ है.
महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता सोमवार को बैठकों में व्यस्त रहे.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सुबह दिल्ली पहुंचे और केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात की. शिवसेना के नेताओं ने शाम को मुंबई में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात की.
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की. राजनीतिक हलकों में माना जा रहा था कि इन बैठकों से सरकार गठन का कोई फार्मूला निकल सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.
इसके अलावा समाजवादी पार्टी को 2, एमआईएम को 2, एमएनएस व सीपीआई को एक-एक और अन्य को 23 सीटें मिली हैं.
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं और बहुमत के लिए 145 सदस्यों का समर्थन चाहिए. लेकिन, बहुमत की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि बहुमत साबित करते समय विधानसभा में कितने सदस्य मौजूद हैं.
उदाहरण के लिए अगर एनसीपी उस दिन ख़ुद को मतदान से अलग रखती है तो बहुमत के लिए सिर्फ़ 115 सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत होगी जिसे बीजेपी आसानी से जुटा सकती है.
बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है लेकिन अब भी उनके साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर स्थिति साफ़ नहीं है. राज्य में राजनीतिक माहौल उलझन भरा बना हुआ है. ऐसे में आगे के हालात को लेकर कुछ सवाल खड़े होते हैं.
अगर 9 नंवबर तक स्थितियां ऐसी ही बनी रहीं तो आगे क्या विकल्प हो सकते हैं. क्या कोई सरकार बन सकती है या न बनने पर क्या हो सकता है? केयर टेकर सरकार कब तक काम कर सकती है?
अधिवक्ता असीम सरोदे बताते हैं, "भारतीय संविधान की धारा 172 राज्य विधानसभा का कार्यकाल निर्धारित करती है. ये धारा साफ़ तौर पर कहती है कि अगर विधानसभा अपने पांच साल के कार्यकाल से पहले भंग नहीं होती तो उसे पूरे पांच साल काम करना होगा. अगर वो पूरे पांच साल काम कर लेती है तो उसके बाद उसे भंग माना जाएगा और एक नई विधानसभा का गठन होगा."
2014 के चुनाव के बाद महाराष्ट्र विधानसभा का गठन 10 नवंबर 2014 को हुआ था. ऐसे में विधानसभा को 9 नवंबर 2019 को भंग हो जाना चाहिए.
जिस पार्टी ने सबसे ज़्यादा सीटें हासिल की हों उससे आगे आकर सरकार बनाने की उम्मीद की जाती है या राज्यपाल उसे सरकार बनाने का न्योता देते हैं. लेकिन, वर्तमान परिदृश्य में ऐसा कुछ नहीं हुआ है.
अगर 9 नंवबर तक कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती या राज्यपाल का न्योता स्वीकार नहीं करती तो ऐसे में राज्यपाल की भूमिका काफ़ी अहम हो जाती है.
महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व सचिव अनंत कल्से ने बीबीसी मराठी को बताया, "राज्यपाल और सबसे ज़्यादा सीटें पाने वाली पार्टी सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने पर बीजेपी को राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा करते हुए पत्र देना चाहिए या राज्यपाल उन्हें इसके लिए न्योता देते हैं."
संविधान विशेषज्ञ डॉ. उल्हास बापत कहते हैं, "राज्यपाल सबसे ज़्यादा सीट पाने वाली पार्टी को न्योता देते हैं. महाराष्ट्र में अभी की स्थिति को देखते हुए राज्यपाल बीजेपी को बुलाएंगे. अगर बीजेपी के नेता सरकार बनाने का न्योता स्वीकार करते हैं तो उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा. अगर बीजेपी सरकार बनाने से इनकार कर देती है तो दूसरे नंबर की पार्टी को मौका दिया जाएगा."
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